Saturday, April 10, 2010

आज के युग में सभी लोग पत्रकारों से बहुत कुछ उमीदें रखते हैं, उन्हें लोकतंत्र का चौथा खम्बा भी बताते हैं , पर हम सभी अच्छी तरह से
जानते हैं की किस तरह सबसे दुश्मनी मोल लेते हुए, तो कभी कभी मार खाकर
लहुलोहान होते हुए ये कलमकार जनता तक सच पहुंचाते हैं | पर उसमें सच की मात्रा
उतनी ही होती हे जितना अखबार के संचालक चाहते हैं | अगर किसी जोशीले पत्रकार ने किसी तरह
जरुरत से ज्यादा सच परोस दिया तो वे तुरंत हाशिये पर पंहुचा दिए जाते हैं, हममे से अधिकांश नावाकिफ हें की देश के कितने पत्रकारों को इज्जत सम्मान तो
दूर, अपने घर रोटी के गुजारे लायक भी मेहनताना नसीब नहीं होता (आप उन
पत्रकारों को बक्श दें जिनकी रातें रोजाना राजनीतिज्ञ ,कार्पोरेट ,सितारों
के साथ सुरमई होती हे ) लेकिन 90% टूटे स्कूटर या फूटी साइकिल पर जिन्दगी
जीने को ही देश का चौथा खम्बा बना रहने को मजबूर हे , किसी आसामायिक
दुर्घटना या फिर मोंत हो जाने पर ना तो देश की सरकार ना कार्पोरेट अखबार
नवीस और ना ही देश की जनता से कोई आर्थिक मदद मिलती हे , कलम के बूते दम
भरने वाला उत्साही पत्रकार को स्याही भी नसीब नहीं होती , और हम उससे उम्मीद रखते हैं व्यवस्था परिवर्तन की |

6 comments:

मनोज कुमार said...

अच्छी प्रस्तुति। बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

tulsibhai said...

" bilkul sahi likhha hai aapne ..aaj kal journlist ki halat yahi hai aur log bahut kuch ummide rakh te hai JOURNALIST se "

" aapko aapke is sunder aur sarthak post ke liye badhai "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

Dr. Munish Raizada said...

आपने सही मुद्दा उठाया है. पत्रकारिता के पेशे का दर्जा ऊपर उठाने की आवश्यकता है, ताकि युवा लोग इसे पेशे की तरह अपनाएं. भारतीय पत्रकारिता में आचार सहिंता का भारी आभाव है, इसी के चलते नैतिकता के पैमाने पर सही तथा उच्च कोटि का जौर्नालिस्म देखने को नहीं मिलता.

संगीता पुरी said...

इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

भूतनाथ said...

अरे वाह,यह पहल तो बड़ी अच्छी है....इसकी सफलता के लिए अग्रिम शुभकामनाएं.....!!वैसे मैं यहाँ सिर्फ नारनौल,महेंद्रगढ़ देखकर आ गया था मैं यहीं से हूँ शिवाजी नगर पुरानी कचहरी के सामने हमारा मकान है,वहां राजेंद्र वर्मा(मेडिसिन शॉप वाले)सुभाष वर्मा,प्रकाश वर्मा और हमारे सारे नाते-रिश्तेदार हैं और हम कभी-कभी यहाँ आया करते हैं....पुरानी.....यादें....पीछा नहीं छोडती.....नहीं छोडती ना.....???
http://baatpuraanihai.blogspot.com/

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } said...

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

कलम के पुजारी अगर सो गये तो

ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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